डंडखोरा में वट सावित्री व्रत: सुहागिन महिलाओं ने उत्साह से की पति की दीर्घायु की कामना
डंडखोरा,कटिहार: कटिहार जिले के डंडखोरा प्रखंड क्षेत्र में वट सावित्री व्रत का पर्व सुहागिन महिलाओं ने बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया। हिंदू धर्म में प्रेम, श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक यह पर्व ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाओं, खासकर नवविवाहिताओं ने वट (बरगद) वृक्ष की पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना की। डंडखोरा में यह त्योहार उत्सव की तरह मनाया गया, जिसमें महिलाओं की भक्ति और उत्साह देखते बनता था।
इस अवसर पर महिलाओं ने विधि-विधान के साथ वट वृक्ष के नीचे पूजा-अर्चना की। पूजा में फल, फूल, पान, सिंदूर, चंदन, रोली, कच्चा सूत, और बांस के पंखे शामिल किए गए। कई नवविवाहिताओं ने अपने मायके में यह व्रत मनाया। पूजा के बाद वट सावित्री की कथा का वाचन किया गया, जिसमें सावित्री द्वारा अपने पति सत्यवान को यमराज से वापस लाने की कथा सुनी गई। इसके बाद सुहागिन महिलाओं के बीच प्रसाद के रूप में अंकुरित चने, लीची, आम, केला, नारियल, अंगूर और विभिन्न पकवान बांटे गए।
ममता कुमारी, अंजली आनंद, मालो देवी, और पूजा कुमारी जैसी महिलाओं ने बताया कि वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में पति के प्रति प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “हम पूरी श्रद्धा और सच्ची आस्था के साथ यह पूजा करते हैं ताकि हमारे पति की उम्र लंबी हो और हमारा वैवाहिक जीवन सुखमय रहे।” इस दौरान अभिजीत मुहूर्त में गुड़िया की शादी और सिंदूर दान की रस्म भी की गई, जो इस पर्व का विशेष हिस्सा है।
ट सावित्री व्रत की पौराणिक कथा के अनुसार, सावित्री ने अपने तप और भक्ति से यमराज को प्रसन्न कर अपने पति सत्यवान को मृत्यु के बाद जीवित कर लिया था। यही कारण है कि सुहागिन महिलाएं इस व्रत को पूरे मन और श्रद्धा से करती हैं। डंडखोरा में इस पर्व को देखकर ऐसा लगता था मानो पूरा क्षेत्र भक्ति और उत्सव के रंग में रंगा हो। महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर, वट वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटा और भगवान शिव-पार्वती की पूजा की।
यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक एकता को भी बढ़ावा देता है। डंडखोरा की महिलाओं ने एक-दूसरे के साथ मिलकर पूजा की और प्रसाद बांटकर आपसी प्रेम को मजबूत किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह त्योहार उनके लिए परिवार और परंपराओं को जोड़े रखने का एक खास अवसर है। इस पर्व ने डंडखोरा में भक्ति और उत्साह का माहौल बना दिया, और लोग इसकी यादों को लंबे समय तक संजोकर रखेंगे।


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