धामपुर में खनन माफियाओं का आतंक: मिट्टी का अवैध खनन, अधिकारियों की चुप्पी
बिजनौर जिले के धामपुर तहसील के गांवों में इन दिनों खनन माफियाओं का बोलबाला है। हरेवली, निंद्रू मिल्क और भज्जावाला जैसे गांवों में मिट्टी का अवैध खनन जोरों पर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब खनन अधिकारियों की शह पर हो रहा है। खेतों की उर्वर मिट्टी को जेसीबी मशीनों से खोदा जा रहा है, जिससे खेती की जमीन बंजर हो रही है और पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है।
हर दिन दर्जनों डंपर और सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉली मिट्टी लेकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इससे न केवल सड़कें खराब हो रही हैं, बल्कि धूल से गांव वालों को सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने अवैध खनन पर सख्त नियम बनाए हैं, लेकिन धामपुर में इन नियमों को ठेंगा दिखाया जा रहा है। ग्रामीणों ने कई बार जिला प्रशासन और खनन विभाग से शिकायत की, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई।
हरेवली के एक किसान रामपाल (बदला हुआ नाम) ने बताया, “हमारे खेतों की मिट्टी चुराकर माफिया मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। खनन अधिकारी को सब पता है, लेकिन वो कुछ नहीं करते। शायद उनकी भी सांठगांठ है।” ग्रामीणों का कहना है कि मिट्टी का इस्तेमाल निर्माण कार्यों या जमीन को समतल करने के लिए किया जा रहा है, लेकिन इसके लिए कोई वैध अनुमति नहीं ली जा रही।
कानून के मुताबिक, मिट्टी खनन के लिए खनन विभाग से अनुमति लेना जरूरी है। इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम), खनन अधिकारी और खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) को आवेदन देना होता है। आवेदन में जमीन के मालिक का विवरण, खनन की मात्रा, और वाहनों की जानकारी देनी होती है। लेकिन धामपुर में ये नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। छोटे-मोटे ट्रैक्टर चालकों पर कार्रवाई होती है, जबकि बड़े माफिया खुलेआम जेसीबी और डंपरों से खनन कर रहे हैं।
पिछले कुछ सालों में बिजनौर में अवैध खनन के खिलाफ छिटपुट कार्रवाई हुई है। साल 2020 में, बिजनौर के उप-जिला मजिस्ट्रेट (एसडीएम) ने जलालपुर काजी गांव में अवैध खनन करते हुए एक जेसीबी और दो डंपर पकड़े थे। इन वाहनों को पुलिस को सौंपा गया था। लेकिन ऐसी कार्रवाइयां कम ही होती हैं और असली सरगनाओं तक नहीं पहुंचतीं। उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों, जैसे गोंडा और उन्नाव, में भी अवैध खनन की समस्या देखी गई है, जहां प्रशासन ने जेसीबी और ट्रैक्टर जब्त किए, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
इस अवैध खनन का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि मिट्टी की ऊपरी परत हटाने से जमीन की उर्वरता खत्म हो रही है। गहरे गड्ढों की वजह से भूजल स्तर भी नीचे जा रहा है, जिससे पानी की कमी हो सकती है। साथ ही, सरकार को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है, क्योंकि अवैध खनन में कोई टैक्स या रॉयल्टी नहीं दी जाती।
गांव वालों का गुस्सा अब बढ़ता जा रहा है। वे चाहते हैं कि प्रशासन सख्त कदम उठाए और दोषी अधिकारियों पर भी कार्रवाई करे। बिहार में लागू नियमों के तहत, अवैध खनन करने वालों को पांच साल तक की जेल और प्रति हेक्टेयर पांच लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है। धामपुर के लोग अब ऐसी ही सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने अवैध खनन की शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर (18001231171) और यूपी माइन मित्र पोर्टल शुरू किया है। लेकिन धामपुर में ये सिस्टम नाकाम साबित हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बड़े माफियाओं और उनके साथी अधिकारियों पर शिकंजा नहीं कसा जाएगा, तब तक यह गोरखधंधा बंद नहीं होगा।
क्या धामपुर के खेतों को बर्बादी से बचाया जा सकेगा? क्या प्रशासन खनन म афियाओं पर नकेल कसेगा? ये सवाल हर गांव वाले के मन में हैं। अब देखना यह है कि सरकार और प्रशासन इस समस्या का हल निकालते हैं या माफियाओं का खेल यूं ही चलता रहेगा।

