कटिहार में ट्रैक्टर दुर्घटना के बाद आदिवासी समाज का आक्रोश, हसनगंज में सड़क जाम कर प्रदर्शन

हसनगंज प्रखंड मुख्यालय की मुख्य सड़क पर प्रदर्शन करते आदिवासी समाज के लोग।

कटिहार, 14 जून 2025: बिहार के कटिहार जिले के हसनगंज प्रखंड में 31 मई 2025 को हुए एक ट्रैक्टर हादसे ने अब सामाजिक आक्रोश का रूप ले लिया है। हादसे में गंभीर रूप से घायल कवर कोठी निवासी शिवाजी उरांव की बिगड़ती हालत और पुलिस की कथित लापरवाही के खिलाफ आदिवासी समाज ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने हसनगंज प्रखंड मुख्यालय की मुख्य सड़क को जाम कर थानाध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी की और तत्काल कार्रवाई की मांग की।

जानकारी के अनुसार, 31 मई को शाम करीब 4:30 बजे कवर कोठी के रहने वाले शिवाजी उरांव अपनी ससुराल नारियल बड़ी जा रहे थे, तभी एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने उन्हें टक्कर मार दी। इस भीषण हादसे में शिवाजी गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना मिलते ही हसनगंज पुलिस मौके पर पहुंची और ट्रैक्टर को कब्जे में ले लिया। घायल शिवाजी को तुरंत कटिहार के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह पिछले 13 दिनों से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।

प्रदर्शन के दौरान थानाध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी करते सिनोद उरांव और अन्य प्रदर्शनकारी।

हादसे के बाद ट्रैक्टर मालिक ने शिवाजी के इलाज का वादा किया, लेकिन कुछ रुपये देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। परिजनों का आरोप है कि हसनगंज थानाध्यक्ष ने ट्रैक्टर मालिक से कथित तौर पर अवैध वसूली कर ट्रैक्टर को छोड़ दिया। यह खबर आदिवासी समाज में आग की तरह फैल गई, जिसके बाद समाज में भारी आक्रोश भड़क उठा।

इसके विरोध में अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद युवा प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष सिनोद उरांव के नेतृत्व में सैकड़ों आदिवासी समुदाय के लोग हसनगंज प्रखंड मुख्यालय की मुख्य सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर थानाध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी की और शिवाजी के लिए न्याय की मांग की। प्रदर्शन में संगठन के कोषाध्यक्ष ऋषभ लकड़ा, कटिहार प्रखंड अध्यक्ष रामू उरांव, संथाल समाज के मनोज मुर्मू, अजय तिर्की, विकास उरांव, जिला प्रवक्ता संजय कुजूर, और जिला सचिव चितरंजन उरांव सहित कई लोग शामिल थे।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस की मिलीभगत से ट्रैक्टर मालिक को बचाने की कोशिश की गई, जबकि शिवाजी का परिवार न्याय से वंचित है। सिनोद उरांव ने कहा, “यह बेहद शर्मनाक है कि पुलिस ने पैसे लेकर ट्रैक्टर मालिक को छोड़ दिया। शिवाजी की हालत बेहद नाजुक है, और उनके परिवार को इंसाफ चाहिए। हम तब तक पीछे नहीं हटेंगे, जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती।”

परिजनों ने बताया कि शिवाजी का इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा है, और उनकी हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इलाज का खर्च उठाना भी मुश्किल हो रहा है। शिवाजी की पत्नी ने रोते हुए कहा, “हमें सिर्फ इंसाफ चाहिए। ट्रैक्टर मालिक और पुलिस ने हमें धोखा दिया है। मेरे पति की जिंदगी खतरे में है।”

प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम होने से हसनगंज क्षेत्र में कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। उन्होंने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।

यह प्रदर्शन आदिवासी समाज की एकजुटता और अन्याय के खिलाफ उनकी आवाज को दर्शाता है। स्थानीय लोगों ने भी इस प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा कि पुलिस की लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण आम लोगों को इंसाफ नहीं मिल पा रहा है।

हसनगंज थानाध्यक्ष ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और उचित कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने कटिहार में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, और यह देखना होगा कि शिवाजी और उनके परिवार को कब तक इंसाफ मिल पाता है।

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