पूर्णिया में डायन प्रथा की क्रूरता: आदिवासी परिवार के 5 सदस्य जिंदा जलाए गए, गांव में सन्नाटा
पूर्णिया, बिहार: बिहारके पूर्णिया जिले के टेटगामा गांव में 6 जुलाई 2025 की रात एक दिल दहलाने वाला हत्याकांड हुआ, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया। अंधविश्वास और डायन प्रथा के नाम पर करीब 250 लोगों की उन्मादी भीड़ ने उरांव जनजाति के एक परिवार के पांच सदस्यों—बाबूलाल उरांव (50), उनकी पत्नी सीता देवी (40), मां कायो मसोमात (70), बेटा मनजीत उरांव (25), और बहू रानी देवी (20)—को बेरहमी से पीटकर जिंदा जला दिया। यह जघन्य अपराध अशिक्षा और तांत्रिकों के जहरीले प्रभाव का भयानक परिणाम है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।
घटना रात करीब 3 बजे की है, जब टेटगामा गांव में रामदेव उरांव के एक बेटे की बीमारी से मृत्यु और दूसरे के बीमार होने की अफवाह को डायन प्रथा से जोड़कर सीता देवी और कायो मसोमात को दोषी ठहराया गया। तांत्रिक नकुल उरांव ने भीड़ को और उकसाया। भीड़ ने बाबूलाल के घर पर धावा बोला, परिवार को तालाब के पास खींचकर ले गई, जहां बांस के डंडों से उनकी बेरहमी से पिटाई की गई। इसके बाद पेट्रोल छिड़ककर सभी को जिंदा जला दिया गया। शवों को जलकुंभी के नीचे छिपाने की कोशिश की गई, लेकिन परिवार का 16 वर्षीय बेटा सोनू भागकर अपनी जान बचाने में कामयाब रहा और उसने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस अधीक्षक स्वीटी सहरावत और डीएम अंशुल कुमार ने तुरंत घटनास्थल का दौरा किया। फॉरेंसिक और डॉग स्क्वायड की मदद से शव बरामद किए गए, जो इतने जल चुके थे कि उनकी पहचान मुश्किल थी। पुलिस ने तांत्रिक नकुल उरांव सहित 23 लोगों को गिरफ्तार किया है और 223 नामजद व 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मंगलवार सुबह पुलिस की निगरानी में कप्तान पुल पर पीड़ितों का अंतिम संस्कार आदिवासी रीति-रिवाज से किया गया। गांव में सन्नाटा पसरा है, और अधिकांश ग्रामीण फरार हैं।
पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने इस घटना को “मानवता पर कलंक” करार देते हुए CBI जांच की मांग की और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की। राजद नेता तेजस्वी यादव ने X पर बिहार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे सामाजिक पाखंड और वंचित समुदायों के खिलाफ घृणा से जोड़ा। झारखंड कांग्रेस ने भी जांच के लिए एक टीम भेजी है और अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने की घोषणा की है।
टेटगामा गांव में उरांव जनजाति के करीब 50 परिवार रहते हैं, जहां अशिक्षा और तंत्र-मंत्र पर गहरा विश्वास व्याप्त है। NCRB के आंकड़ों के अनुसार, बिहार और झारखंड में डायन प्रथा के नाम पर हर साल सैकड़ों लोग, विशेषकर महिलाएं, हिंसा का शिकार बनती हैं। यह घटना समाज में शिक्षा और जागरूकता की कमी को उजागर करती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि गांव में शराब का अवैध कारोबार और तांत्रिकों का प्रभाव इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा देता है।
प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता अभियान शुरू करने की घोषणा की है। डीएम अंशुल कुमार ने कहा, “यह अंधविश्वास में किया गया शर्मनाक कृत्य है। लोगों को शिक्षा की ओर बढ़ना चाहिए।” स्कूलों और पंचायतों में जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। पीड़ित परिवार के एकमात्र जीवित सदस्य सोनू को किशोर न्यास बोर्ड, पूर्णिया में सुरक्षा और सहायता दी जा रही है।
यह हत्याकांड न केवल पूर्णिया, बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी है कि अंधविश्वास और अशिक्षा समाज को कितना पीछे ले जा सकते हैं। भाकपा माले और कांग्रेस ने इस घटना को “वीभत्स और दुखद” बताते हुए दोषियों को कड़ी सजा और पीड़ित परिवार को न्याय व मुआवजे की मांग की है। समाज के हर वर्ग से अब यह आवाज उठ रही है कि डायन प्रथा जैसी क्रूर प्रथाओं को जड़ से खत्म करने के लिए शिक्षा, जागरूकता, और कठोर कानूनी कार्रवाई को बढ़ावा देना होगा।
संपादक: बबलू मरांडी ( पूर्णिया ).

