संचयिका दिवस 2025: स्कूलों में बचत और बैंकिंग जागरूकता को बढ़ावा !
पटना, बिहार | 15 सितंबर, 2025: प्रतिवर्ष 15 सितंबर को पूरे भारत में संचयिका दिवस (Sanchayika Day) मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य स्कूली छात्रों में बचत की आदत को प्रोत्साहित करना और बैंकिंग प्रणाली के प्रति जागरूकता फैलाना है। इस दिन स्कूलों में छात्रों को बचत के लाभ और बैंकिंग सिस्टम की उपयोगिता के बारे में बताया जाता है। हालांकि, भारत के कई स्कूलों में अभी भी यह दिवस नहीं मनाया जाता, लेकिन बढ़ती जागरूकता के साथ लोग बैंकिंग के फायदों को समझने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दिवस को हर स्कूल और कॉलेज में मनाया जाना चाहिए।
संचयिका दिवस पर छात्रों के साथ-साथ उनके माता-पिता को भी बैंकिंग प्रणाली और बचत के महत्व के बारे में जागरूक किया जाता है। छात्रों को नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और कैशलेस मनी ट्रांसफर जैसे आधुनिक बैंकिंग साधनों के लाभ समझाए जाते हैं, ताकि वे अपने बैंकिंग कार्य आसानी से कर सकें। आज भी भारत के कई हिस्सों में लोग जागरूकता की कमी के कारण घंटों बैंक की कतारों में खड़े रहते हैं, जबकि बड़े शहरों में नेट और मोबाइल बैंकिंग के उपयोग से समय की बचत हो रही है।
संचयिका बैंक: छात्रों के लिए विशेष योजना
संचयिका बैंक मुख्य रूप से स्कूली छात्रों के लिए बनाई गई योजना है। इसके तहत छात्रों के लिए बैंक खाते खोले जाते हैं और उन्हें कम उम्र से ही बचत के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। यह योजना 1970 के दशक में भारतीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय बचत योजना के तहत शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य छात्रों को दैनिक जीवन में बैंकिंग और बचत का महत्व समझाना है।
संचयिका दिवस का महत्व
बचत की आदत: कम उम्र में छात्रों में पैसे बचाने की आदत को बढ़ावा देना।
बैंकिंग जागरूकता: छात्रों को बैंकिंग सुविधाओं और कार्यों से अवगत कराना।
धन प्रबंधन: जीवन के शुरुआती चरणों में धन प्रबंधन की शिक्षा देना।
बचत के लाभ: बचत के दीर्घकालिक फायदों के बारे में जानकारी प्रदान करना।
संचयिका दिवस के अवसर पर स्कूलों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें बैंकिंग विशेषज्ञ और शिक्षक छात्रों को वित्तीय साक्षरता के बारे में जानकारी देते हैं। यह दिवस न केवल छात्रों को वित्तीय जिम्मेदारी सिखाता है, बल्कि उन्हें आधुनिक बैंकिंग तकनीकों से जोड़कर भविष्य के लिए तैयार करता है।

