विकसित कृषि संकल्प अभियान: कटिहार के डंडखोरा में किसानों की समस्याओं का समाधान या महज औपचारिकता?
कटिहार: कटिहार के डंडखोरा प्रखंड में केंद्र सरकार के विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत शुक्रवार को कृषि भवन में एक संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसका मकसद किसानों की आय दोगुनी करना, उन्हें सशक्त बनाना और सरकारी योजनाओं की जानकारी देना था। देशभर के 700 से ज्यादा जिलों में 2000 से अधिक कृषि वैज्ञानिकों की भागीदारी के साथ यह अभियान 1.30 करोड़ किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य रखता है।कार्यक्रम का उद्घाटन अनुमंडल कृषि पदाधिकारी रंजीत कुमार झा, सहायक निदेशक (रसायन) इंद्रजीत मंडल, कृषि वैज्ञानिक पंकज कुमार, जूट वैज्ञानिक दिवाकर पासवान, प्रखंड कृषि पदाधिकारी नवीन कुमार और कृषक सूचना सलाहकार शेख साबिर ने दीप प्रज्वलन कर किया। नोडल कृषि समन्वयक अभिनंदन कुमार झा ने मंच संचालन किया।
कृषि वैज्ञानिक पंकज कुमार ने खरीफ मौसम में धान खेती पर जोर देते हुए बीज उपचार की सलाह दी, ताकि रोगों से बचा जा सके। रंजीत कुमार झा ने मक्का कटाई के बाद खाली खेतों में ढैंचा और मूंग की बुवाई की सिफारिश की, जो हरी खाद के रूप में धान को लाभ देगी। इंद्रजीत मंडल ने मिट्टी जांच की जरूरत बताई, ताकि सही उर्वरक चुना जा सके। दिवाकर पासवान ने जूट खेती के फायदे गिनाए, जिसमें जूट के पत्तों से चाय पत्ती बनाने की बात शामिल थी। प्रखंड कृषि पदाधिकारी ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, और कृषि ऋण योजनाओं की जानकारी दी।
किसानों की समस्याएं और सवाल
डंडखोरा के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किसानों ने अपनी परेशानियां बताईं। स्थानीय किसान शंभु कुमार मंडल ने कहा कि बाढ़ में मेहनत से उगाए धान और मक्का को सरकारी खरीद केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) नहीं मिलता। धान का सरकारी रेट 2300 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन दलाल 1600 रुपये में खरीदते हैं। मक्का का MSP 2100-2200 रुपये है, पर किसानों को 1600 रुपये ही मिलते हैं। खाद की कालाबाजारी भी बड़ी समस्या है। खरीफ मौसम में खाद की कमी रहती है और किसानों को दोगुने दाम चुकाने पड़ते हैं। सरकारी गोदामों में अनाज खरीद की जटिल प्रक्रिया और बिचौलियों का दबदबा छोटे किसानों को परेशान करता है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसल बीमा और मृदा परीक्षण में देरी भी मुश्किलें बढ़ाती है।किसानों ने बाढ़ से प्रभावित फसलों के लिए तुरंत मुआवजा और विशेष पैकेज की मांग की। उनका कहना है कि यह अभियान तभी कामयाब होगा, जब कागजी कार्रवाई आसान हो और बिचौलियों का प्रभाव खत्म हो।
क्या केवल औपचारिकता?
किसानों का मानना है कि ऐसे अभियान अक्सर कागजों तक सीमित रहते हैं। डंडखोरा में बाढ़, खाद की कमी, और MSP की समस्या पुरानी है। अगर सरकार इनका स्थायी समाधान नहीं करती, तो यह अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह सकता है।
कार्यक्रम में भाजपा प्रखंड अध्यक्ष आलोक चौहान, जदयू प्रखंड अध्यक्ष कुंदन महतो, भाजपा जिला उपाध्यक्ष आलोक मंडल, पंचायत समिति सदस्य बसंत चौहान, सरपंच दिनेश मंडल, कृषक सूचना सलाहकार शेख साबिर, किसान सलाहकार मोहम्मद तनवीर आलम, शंभू नाथ मंडल, रानी देवी, रूपेश कुमार, और कई अन्य किसान मौजूद थे।

