कटिहार में छापेमारी पर विवाद: कांग्रेस ने उठाए जांच एजेंसी पर सवाल, एनडीए मंत्रियों पर लगाया दुरुपयोग का आरोप
कटिहार जिले के मनिहारी में लोक शिकायत निवारण अधिकारी श्वेता मिश्रा के सरकारी आवास पर 5 जून 2025 को स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) की छापेमारी के बाद अब इस कार्रवाई पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। कटिहार कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुनील कुमार यादव ने जांच एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि देश की तमाम जांच एजेंसियां एनडीए मंत्रियों के इशारे पर काम कर रही हैं। इस छापेमारी में अधिकारियों के एक मंत्री की गाड़ी से पहुंचने का दावा कर सुनील ने इस मामले की विशेष जांच की मांग की है।
सुनील कुमार यादव ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह बेहद चिंताजनक है कि SVU की टीम किसी मंत्री की गाड़ी से श्वेता मिश्रा के आवास पर छापेमारी करने पहुंची। इससे साफ होता है कि जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रही हैं, बल्कि एनडीए मंत्रियों के निर्देश पर कार्रवाई कर रही हैं।” उन्होंने पूछा कि आखिर क्यों जांच एजेंसी को किसी मंत्री की गाड़ी से छापेमारी के लिए जाना पड़ा? क्या यह कार्रवाई किसी सियासी बदले की भावना से की गई?
कटिहार के मिरचाई बारी स्थित श्वेता मिश्रा के सरकारी क्वार्टर पर SVU ने आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के आरोपों में छापेमारी की थी। इस दौरान कई अहम दस्तावेज और संपत्ति से जुड़े कागजात जब्त किए गए। लेकिन सुनील कुमार यादव का कहना है कि इस कार्रवाई की निष्पक्षता संदिग्ध है। उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन यह किसी मंत्री या विधायक के इशारे पर नहीं होनी चाहिए। यह लोकतंत्र के लिए खतरा है।”
सुनील ने यह भी दावा किया कि इंडिया गठबंधन के नेताओं ने पहले भी जांच एजेंसियों के दुरुपयोग को लेकर आवाज उठाई है। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ सालों में कई बार देखा गया है कि एनडीए सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए करती है। कटिहार में यह घटना इसका जीता-जागता उदाहरण है।” उन्होंने मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और यह पता लगाया जाए कि छापेमारी के पीछे किसके निर्देश थे।
स्थानीय लोगों में भी इस छापेमारी को लेकर चर्चा जोरों पर है। मनिहारी के एक निवासी, रमेश यादव, ने कहा, “अगर जांच एजेंसी वाकई भ्रष्टाचार रोकना चाहती है, तो कार्रवाई निष्पक्ष होनी चाहिए। लेकिन अगर कोई मंत्री इसमें शामिल है, तो यह आम जनता के भरोसे को तोड़ता है।” वहीं, कुछ लोग इस कार्रवाई को बिहार सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा मान रहे हैं।
SVU के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि श्वेता मिश्रा के खिलाफ ठोस सबूतों के आधार पर छापेमारी की गई थी, और यह कार्रवाई कोर्ट के सर्च वारंट के तहत हुई। उन्होंने मंत्री की गाड़ी के दावे को खारिज करते हुए कहा कि जांच पूरी तरह पारदर्शी है। हालांकि, सुनील कुमार यादव ने इस बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सब कुछ पारदर्शी था, तो मंत्री की गाड़ी का इस्तेमाल क्यों हुआ?
कटिहार में यह मामला अब सियासी रंग ले चुका है। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं ने इस घटना को एनडीए सरकार के खिलाफ एक बड़ा मुद्दा बनाने की बात कही है। सुनील कुमार यादव ने कहा, “हम इस मामले को बिहार विधानसभा और केंद्र सरकार तक ले जाएंगे। जांच एजेंसियों का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
इस बीच, SVU ने श्वेता मिश्रा के ठिकानों पर जांच जारी रखी है। उनके बैंक खातों, संपत्तियों, और वित्तीय लेनदेन की गहन पड़ताल की जा रही है। अगर जांच में और सबूत मिलते हैं, तो श्वेता मिश्रा के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है। लेकिन इस छापेमारी पर उठे सवालों ने पूरे मामले को और जटिल बना दिया है।
कटिहार की जनता अब इस सवाल का जवाब चाहती है कि क्या जांच एजेंसी वाकई भ्रष्टाचार के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई कर रही है, या यह किसी सियासी साजिश का हिस्सा है? इस मामले में आने वाले दिनों में और खुलासे होने की उम्मीद है।

