रुपौली में नीलगाय का आतंक: मकई फसल को तोड़-फोड़ कर तबाह किया, किसान रो-रोकर कर रहे गुहार
पूर्णिया। रुपौली प्रखंड के दियारा इलाके में नीलगाय के झुंड ने किसानों की मकई फसल को बुरी तरह तबाह कर दिया है। आंधी-बारिश-ओलावृष्टि से बचकर बची हुई फसल अब नीलगाय के हमले से पूरी तरह बर्बाद हो रही है, जिससे किसान गहरे संकट में फंस गए हैं।
रुपौली प्रखंड के कोयली, सिमरा पश्चिम, नंदगोला और बहियार समेत कई दियारा गांवों में नीलगाय के झुंड दिन-रात मकई के खेतों में घुसकर फसल को तोड़-फोड़ रहे हैं। जब मकई में भुट्टा बनने लगा था, तभी नीलगाय ने फसल को चरना शुरू कर दिया। किसान जब खेत देखने जाते हैं तो मकई के खेत में नीलगाय का झुंड देखकर और फसल बर्बाद देखकर रो पड़ते हैं।
एक किसान ने बताया, “पहले तूफान और ओले ने हमारी आधी फसल नष्ट कर दी, अब बची-खुची फसल नीलगाय खा रही है। खेती ही हमारी एकमात्र जीविका है। अब बाल-बच्चों का भरण-पोषण कैसे करेंगे? सारा जमा पूंजी और उधार लेकर खाद-बीज में लगा दिया था, अब कर्ज कैसे चुकाएंगे?”
किसानों ने जिला वन विभाग पूर्णिया से तत्काल मांग की है कि नीलगाय के झुंड को खेतों से हटाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। कई किसान नीलगाय के डर से खेतों में जाने से भी कतरा रहे हैं और लगातार भय में जी रहे हैं।
रुपौली के किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन और वन विभाग समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता तो इस सीजन में उनकी पूरी फसल नष्ट हो जाएगी और परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएगा।


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