कटिहार में मखाना खेत विवाद ने लिया हिंसक रूप: आदिवासी समुदाय में मारपीट, कई घायल

कटिहार के खैरा संथाली टोला में मखाना खेत विवाद के बाद मारपीट से घायल लोगों को अस्पताल ले जाते हुए।

कटिहार/बिहार: कटिहार जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र अंतर्गत खैरा संथाली टोला, वार्ड नंबर 05 में मखाना खेत के विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। गुरुवार को गांव के दो पक्षों के बीच जमीन और मखाना खेती को लेकर हुए विवाद में लाठी-डंडों से मारपीट की घटना सामने आई, जिसमें दोनों पक्षों के कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को पहले कटिहार सदर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। मुफस्सिल पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और मामले की जांच शुरू कर दी है।

विवाद का कारण: मखाना खेत और खतियानी जमीन

जानकारी के अनुसार, खैरा संथाली टोला में भीमा मुर्मू (85 वर्ष) के नाम से खतियानी जमीन है, जिसे बिहार सरकार की जमीन के रूप में भी कुछ लोग दावा करते हैं। इस जमीन पर भीमा मुर्मू और उनके परिवार के लोग लंबे समय से मखाना खेती करते आ रहे हैं। इस जमीन को लेकर पहले भी गांव में तनाव रहा, और पंचायत स्तर पर कई बार विवाद सुलझाने की कोशिश की गई, लेकिन कोई हल नहीं निकला।

कटिहार के खैरा संथाली टोला में मखाना खेत विवाद के बाद मारपीट से घायल लोगों को अस्पताल ले जाते हुए।

गुरुवार को गांव के ही आदिवासी समुदाय के करीब 100 लोगों, जिनमें रामनाथ किस्कू (35 वर्ष), साधु मुर्मू (55 वर्ष), बधू सोरेन (50 वर्ष), गणेश सोरेन (65 वर्ष), ताल्लकु सोरेन (65 वर्ष), सैमुअल मरांडी (35 वर्ष), और अनिल सोरेन (35 वर्ष) शामिल थे, ने भीमा मुर्मू और उनके परिवार पर हमला कर दिया। हमले में भीमा मुर्मू के साथ उनके पुत्र मदन मुर्मू (60 वर्ष), अर्जुन मुर्मू (55 वर्ष), कुंदन मुर्मू (50 वर्ष), लखन मुर्मू (45 वर्ष), छांजू मुर्मू (40 वर्ष), और अमित मुर्मू (35 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गए।

हमलावरों का दावा: “मखाना बेचकर समाज के लिए काम”

हमलावरों का दावा है कि विवादित जमीन बिहार सरकार की है और उस पर उगाए गए मखाने को बेचकर सामाजिक कार्यों में उपयोग करने की योजना थी। एक हमलावर ने कहा, “हम लोग मखाना छकने गए थे, ताकि उसकी बिक्री से समाज के लिए कुछ काम हो सके। लेकिन वहां अचानक विवाद बढ़ गया और मारपीट हो गई।” दूसरी ओर, भीमा मुर्मू के परिवार का कहना है कि जमीन उनकी खतियानी संपत्ति है और हमलावरों ने जबरन कब्जा करने की कोशिश की।

पुलिस की कार्रवाई और स्थिति घटना की सूचना मिलते ही कटिहार मुफस्सिल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने बताया कि दोनों पक्षों की शिकायत दर्ज की गई है और मामले की जांच की जा रही है। घायलों को तुरंत कटिहार सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी गंभीर हालत को देखते हुए मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। पुलिस ने कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया है और गांव में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

विपक्ष का तंज: “कानून-व्यवस्था की विफलता”

इस घटना पर विपक्षी दलों ने नीतीश सरकार पर निशाना साधा है। RJD के स्थानीय नेता रमेश यादव ने कहा, “यह घटना बिहार में बिगड़ती कानून-व्यवस्था का सबूत है। आदिवासी समुदाय के बीच इस तरह का हिंसक विवाद सरकार की नाकामी को दर्शाता है।” कांग्रेस ने भी इस मामले में त्वरित कार्रवाई और घायलों को न्याय की मांग की है।

मखाना खेती और बिहार की स्थिति बिहार में मखाना खेती एक प्रमुख आजीविका का स्रोत है, और कटिहार जैसे जिले इसके उत्पादन में अहम भूमिका निभाते हैं। हाल के वर्षों में मखाना खेती को बढ़ावा देने के लिए बिहार सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन जमीन विवाद जैसे मुद्दे इस क्षेत्र में तनाव का कारण बन रहे हैं।

आगे क्या? यह घटना कटिहार में सामाजिक और सियासी तनाव को बढ़ा सकती है। स्थानीय लोग इस बात से चिंतित हैं कि जमीन विवाद और सामुदायिक तनाव भविष्य में और हिंसक रूप ले सकते हैं। प्रशासन ने गांव में शांति बनाए रखने के लिए पंचायत स्तर पर बैठक बुलाने की योजना बनाई है, ताकि इस विवाद का स्थायी समाधान निकाला जा सके।

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