फर्जी कागजातों के ज़रिए पुश्तैनी ज़मीन हड़पने की कोशिश : भू-माफिया सक्रिय

किशनगंज ठाकुरगंज में फर्जी कागजातों से पुश्तैनी जमीन हड़पने का आरोप लगाते पीड़ित मोहम्मद जैनुद्दीन

किशनगंज जिले के ठाकुरगंज निवासी मोहम्मद जैनुद्दीन उर्फ कोठी ने विपक्षी पक्ष शम्सुद्दीन के परिजन व भू-माफिया नईमा खातून के परिजनों पर फर्जी व डुप्लिकेट कागजात बनवाकर उनकी पुश्तैनी ज़मीन से बेदखल करने साथ लगातार केस आदि कर प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित जैनुद्दीन उर्फ कोठी का कहना है कि विपक्षी द्वारा कनकपुर मौजा के खेसरा संख्या 2133 सहित बयालीस खेसरा के जिस ज़मीन को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है।

वह सन् 1954 से उनकी खतियानी और पिता-दादा के ज़माने की रैयती ज़मीन है। जिसे उनके दादा या पिता द्वारा कभी बिक्री नहीं की गई है, न ही उनकी जमीन को सरकार ने अधिगृहित किया है क्योंकि उनके दादा पिता के पास अधिक जमीन ही नहीं था। वे या उनके पूर्वज बीते सौ वर्षों से ठाकुरगंज स्थित इस ज़मीन का उपभोग करते आ रहे हैं। इस ज़मीन पर उनका घर, गोदाम और बाउंड्री चारदीवारी सब कुछ बना हुआ है।

मीडिया को जानकारी देते हुए उन्होंने किशनगंज जिला के अपर समाहर्ता ए डी एम अमरेंद्र कुमार पंकज पर विपक्षी से रिश्वत लेकर विपक्षी के पक्ष में फैसला सुनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि जबकि बी एल टी न्यायालय द्वारा जमीन की भौतिकीय जांच कर फैसला देने का निर्देश दिया गया। ठाकुरगंज अंचलाधिकारी मृत्युंजय कुमार द्वारा जांच रिपोर्ट में जैनुद्दीन का दखल कब्ज़ा दिखाया गया है। बी एल टी में किए गए मुकदमे में विपक्षी ने भी अपना दखल नहीं होने की बात कही है बाबजूद अपर समाहर्ता द्वारा जानबूझकर रिश्वतखोरी कर इस तरह का घृणित कार्य किया गया है ।

पीड़ित ने अपने पिता के नाम से दर्ज जमाबंदी से कई क्रेतागणो पूर्व में जमीन बिक्री की गई है जिस पर मोहम्मद जमाल, शेर अलाम कश्मीरा बेगम, जमालुद्दीन,शकीरा, सूफिया खातून का जमाबंदी कायम है जमीन पर दिखलाकर चले आते हैं। पीड़ित ने कागजात दिखाते हुए दावा किया कि विरोधी पक्ष द्वारा उन पर लगातार कई तरह के केस दर्ज कराए गए ताकि उन्हें परेशान किया जा सके।
उन्होंने बताया कि ADM, DM, पूर्णिया कमिश्नर से लेकर धारा 144 तक के मामलों में फैसला उनके पक्ष में ही आया है।
इसके अलावा मारपीट से जुड़े मामलों में भी वे कानूनी लड़ाई जीत चुके हैं।जैनुद्दीन ने सीधे तौर पर शमशुद्दीन के बेटों (सफीर, नज़ीर उर्फ भुट्टू) पर गलत तरीके से रसीद कटाने और ज़मीन हड़पने का प्रयास करने का आरोप लगाया।
इसके साथ ही, उन्होंने स्थानीय अंचल अधिकारी (CO) की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए:
विरोधी के घर जाने का दावा: उन्होंने आरोप लगाया कि CO जांच के दौरान गोदाम के पास खड़े होकर सीधे विपक्षी पक्ष के घर चले गए और पीड़ित को कोई ठोस जवाब नहीं दिया।पीड़ित पक्ष का कहना है कि जब तमाम प्रशासनिक और कानूनी फोरम से फैसला उनके पक्ष में आया था और विरोधी पक्ष कोई वैध कागजात पेश नहीं कर पाया था।

मृत्युंजय कुमार अंचल अधिकारी के कार्यशैली पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा की एडीएम साहब के आदेश निर्गत होने के मंत्र 12 दिन के भीतर ही उन्होंने सारे निर्देश का अनुपालन कर दिया, जबकि लोगों को सालों साल बीत जाते हैं एडीएम के आदेश का पालन नहीं हो पाता है आखिर ऐसी कौन सी बात हो गई जो उनके सैकड़ो साल से रह रहे जमीन का जमाबंदी अन्य लोगों के नाम कर दिया। उन्होंने जिलाधिकारी के न्यायालय में सुनवाई हेतु आवेदन दिया है, जिनकी सुनवाई 28 जुलाई को होने वाली है | आगामी दिनों होने वाली सुनवाई को लेकर जिलाधिकारी द्वारा नोटिस भी विपक्षीगनों को भेज दिया गया है । उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री बिहार सरकार, भू-सुधार राजस्व मंत्री सहित वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की गुहार लगाई है।

अंचलाधिकारी मृत्युंजय कुमार ने बताया खेसर 2133 में 184 डिसमिल जमीन पर जैनुद्दीन उर्फ कोठी का गोदाम निर्मित है व चारदीवारी बना हुआ है। उनकी अन्य जमीन पर उनके द्वारा बिक्री के माध्यम से प्राप्त क्रेतागनों का दखल कब्जा है।

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