कटिहार में ईसाई प्रार्थना सभा पर जानलेवा हमला: धर्मांतरण के आरोप में आदिवासी टोले में हिंसा, पुलिस जांच शुरू

कटिहार के टीवी टावर मुहल्ला में 10 अगस्त 2025 को ईसाई प्रार्थना सभा पर हुए हमले के बाद घायल पीड़ितों की तस्वीर।

कटिहार, 11 अगस्त 2025: बिहार के कटिहार जिले के टीवी टावर मुहल्ला स्थित आदिवासी टोले में रविवार, 10 अगस्त 2025 को एक ईसाई प्रार्थना सभा के दौरान दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब 30-40 अज्ञात हमलावरों ने लोहे की रॉड और पिस्तौल जैसे हथियारों के साथ प्रार्थना सभा में शामिल लोगों पर हमला कर दिया। इस हमले में 10 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें बच्चे और गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। सोशल मीडिया पर वायरल खबरों के मुताबिक, हमलावरों ने प्रार्थना सभा में मौजूद लोगों को लोहे की रॉड से पीटा, लात मारी, और कई लोगों को जमीन पर गिराकर लहूलुहान कर दिया।

कटिहार के टीवी टावर मुहल्ला में 10 अगस्त 2025 को ईसाई प्रार्थना सभा पर हुए हमले के बाद घायल पीड़ितों की तस्वीर।
घटना के संबंध में पीड़ितों की ओर से सहायक थाना, कटिहार में दर्ज लिखित शिकायत में बताया गया कि सुबह करीब 10 बजे, पास्टर मुन्ना उराँव के नेतृत्व में 40-45 लोग टीवी सेंटर परिसर में ईसाई रीति-रिवाज के अनुसार साप्ताहिक प्रार्थना सभा कर रहे थे। तभी अचानक अज्ञात हमलावरों ने उन पर हमला बोल दिया। शिकायत में कहा गया है कि हमलावरों ने धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए हिंसा को अंजाम दिया। पीड़ितों का आरोप है कि हमलावरों ने न केवल पुरुषों, बल्कि बच्चों और गर्भवती महिलाओं को भी बेरहमी से मारा।

कटिहार के टीवी टावर मुहल्ला में 10 अगस्त 2025 को ईसाई प्रार्थना सभा पर हुए हमले के बाद घायल पीड़ितों की तस्वीर।
यह घटना न केवल कटिहार, बल्कि पूरे बिहार के लिए शर्मनाक मानी जा रही है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म का पालन, पूजा, प्रचार और अभ्यास करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। फिर भी, इस तरह की हिंसक घटना ने न केवल ईसाई समुदाय, बल्कि पूरे आदिवासी समाज में आक्रोश पैदा कर दिया है।
कटिहार के पुलिस अधीक्षक ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने हमलावरों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है और कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि, स्थानीय लोग और पीड़ित परिवार यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या इस मामले में न्याय मिलेगा या यह अन्य मामलों की तरह दब जाएगा।
सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। कुछ यूजर्स ने इसे धार्मिक असहिष्णुता और भीड़ हिंसा का उदाहरण बताते हुए कड़ी निंदा की है। एक एक्स पोस्ट में दावा किया गया कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इस हमले को अंजाम दिया और 25 लोगों को घायल कर प्रार्थना स्थल को अपवित्र किया, लेकिन पुलिस ने हमलावरों की बजाय पास्टर और विश्वासियों को हिरासत में लिया। हालांकि, यह दावा अभी तक आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं हुआ है।
स्थानीय लोग इस घटना को लेकर आक्रोशित हैं और मांग कर रहे हैं कि हमलावरों की तत्काल गिरफ्तारी हो और पीड़ितों को न्याय मिले। यह घटना बिहार में बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता और धर्मांतरण के आरोपों के नाम पर हिंसा की प्रवृत्ति पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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