कटिहार में बिहार बंद के दौरान हंगामा: NDA कार्यकर्ताओं पर पत्रकार को धमकाने का आरोप
कटिहार, 5 सितंबर 2025: बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) द्वारा गुरुवार को बुलाए गए बिहार बंद के दौरान कटिहार के शाहिद चौक पर तनावपूर्ण स्थिति देखी गई। विपक्षी नेताओं ने NDA कार्यकर्ताओं पर “गुंडागर्दी” का आरोप लगाते हुए दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) समर्थकों ने एक पत्रकार को बंद के कवरेज से रोकने की कोशिश की। यह बंद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी के विरोध में बुलाया गया था, जिसे NDA ने “मातृशक्ति के अपमान” से जोड़ा।
विपक्ष का आरोप: “BJP की गुंडागर्दी, पत्रकारों पर हमला” राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस नेताओं ने कटिहार के शाहिद चौक पर हुई घटना को “लोकतंत्र पर हमला” करार दिया। RJD के स्थानीय नेता और पूर्व विधायक प्रत्याशी रमेश यादव ने कहा, “BJP के गुंडों ने मां के नाम पर ड्रामा कर कटिहार में दहशत फैलाने की कोशिश की। एक पत्रकार को खुलेआम धमकाया गया और उनका कैमरा छीनने की कोशिश की गई। यह दिखाता है कि NDA को सच सामने आने से डर है।” कांग्रेस के जिला प्रवक्ता ने भी इस घटना की निंदा करते हुए कहा, “BJP का बिहार बंद सिर्फ एक राजनीतिक नाटक था, और अब वे प्रेस की स्वतंत्रता को कुचलने पर उतर आए हैं।”

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शाहिद चौक पर NDA और BJP कार्यकर्ताओं ने बंद के समर्थन में प्रदर्शन किया, जिसमें सड़क जाम करना और नारेबाजी शामिल थी। इस दौरान एक स्थानीय पत्रकार, जो बंद की कवरेज कर रहा था, को कथित तौर पर कुछ NDA समर्थकों ने रोका और उससे बदसलूकी की। पत्रकार ने बताया कि कार्यकर्ताओं ने उसका कैमरा छीनने की कोशिश की और उसे धमकी दी कि वह “BJP के खिलाफ गलत खबर” न दिखाए। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद विपक्ष ने इसे “BJP की गुंडागर्दी” का सबूत बताया।
NDA का जवाब: “आरोप बेबुनियाद, पत्रकार ने उकसाया” BJP के कटिहार जिला अध्यक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके कार्यकर्ताओं ने किसी पत्रकार के साथ बदसलूकी नहीं की। उन्होंने दावा किया, “हमारा बंद मातृशक्ति के सम्मान के लिए था, और यह पूरी तरह शांतिपूर्ण था। कुछ पत्रकारों ने हमारे कार्यकर्ताओं को उकसाने की कोशिश की, जिसका जवाब कार्यकर्ताओं ने दिया। हम प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं।” NDA ने यह भी कहा कि विपक्ष इस घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है ताकि उनकी “वोटर अधिकार यात्रा” की नाकामी छिप सके।
पुलिस और प्रशासन की भूमिका
कटिहार पुलिस ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए स्थिति को नियंत्रित किया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पत्रकार और NDA कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा, “हमने दोनों पक्षों से शिकायतें ली हैं। वीडियो फुटेज की जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।” हालांकि, विपक्ष ने पुलिस पर “NDA के दबाव में काम करने” का आरोप लगाया।
कटिहार में हुई इस घटना ने बिहार के सियासी माहौल को और गरमा दिया है। विपक्षी नेता इसे BJP की “गुंडागर्दी” और “प्रेस पर हमले” का सबूत बता रहे हैं, जबकि NDA इसे अपनी छवि को नुकसान पहुंचाने की साजिश करार दे रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंद के कारण बाजार और यातायात प्रभावित हुआ, जिससे आम जनता को परेशानी हुई। एक स्थानीय दुकानदार ने कहा, “यह सियासी ड्रामा है, जिसका खामियाजा हमें भुगतना पड़ रहा है।”
यह घटना बिहार में 2025 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी तनाव को और बढ़ा सकती है। विपक्ष इस मुद्दे को प्रेस की स्वतंत्रता और NDA की कथित दबंगई से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की रणनीति बना रहा है। दूसरी ओर, NDA इसे “विपक्ष की साजिश” बताकर अपने समर्थकों को एकजुट करने की कोशिश कर रहा है। कटिहार की यह घटना अब बिहार की सियासत में एक बड़ा मुद्दा बन सकती है।

