दूरदर्शन स्थापना दिवस 2025: 66 सालों की गौरवशाली यात्रा और राष्ट्रीय एकता में योगदान !
नई दिल्ली | 15 सितंबर, 2025: आज 15 सितंबर 2025 को देश दूरदर्शन स्थापना दिवस मना रहा है, जिसकी शुरुआत 15 सितंबर 1959 को ‘टेलीविजन इंडिया’ के रूप में हुई थी। यह भारत में टेलीविजन प्रसारण की शुरुआत थी, जो बाद में ‘दूरदर्शन’ के नाम से जाना गया। 66 सालों की इस यात्रा में दूरदर्शन ने न केवल मनोरंजन और शिक्षा का माध्यम बनकर उभरा, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शुरुआत में दूरदर्शन का प्रसारण सप्ताह में तीन दिन, सिर्फ आधे घंटे के लिए होता था, जिसमें स्कूली बच्चों और किसानों के लिए शैक्षिक कार्यक्रम दिखाए जाते थे। 1965 से इसका प्रसारण रोजाना होने लगा और 5 मिनट का समाचार बुलेटिन शुरू हुआ। 1975 में सैटेलाइट इंस्ट्रक्शनल टेलीविजन एक्सपेरिमेंट (SITE) के तहत छह राज्यों में सामुदायिक टीवी लगाए गए, और इसी साल ‘टेलीविजन इंडिया’ का नाम बदलकर ‘दूरदर्शन’ कर दिया गया। 1976 में यह ऑल इंडिया रेडियो से अलग हो गया।
1982 दूरदर्शन के लिए ऐतिहासिक वर्ष रहा, जब यह ब्लैक एंड व्हाइट से रंगीन प्रसारण में परिवर्तित हुआ और इनसैट-1 के जरिए पहली बार राष्ट्रीय प्रसारण शुरू किया। उसी वर्ष एशियाई खेलों के प्रसारण ने दूरदर्शन की लोकप्रियता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। इसके बाद ‘कृषि दर्शन’, ‘चित्रहार’ और ‘रंगोली’ जैसे कार्यक्रमों ने दर्शकों का दिल जीता। 1966 में शुरू हुआ ‘कृषि दर्शन’ देश में हरित क्रांति का सूत्रधार बना और यह आज भी सबसे लंबे समय तक चलने वाला कार्यक्रम है।
1986 में ‘रामायण’ और बाद में ‘महाभारत’ के प्रसारण ने दूरदर्शन को बुलंदियों पर पहुंचाया। इन धारावाहिकों के प्रसारण के दौरान सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था। लोग प्रसारण से पहले घर की साफ-सफाई करते, अगरबत्ती और दीपक जलाते, और प्रसारण के बाद मिठाई बांटते थे। इन धारावाहिकों ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि सांस्कृतिक एकता को भी मजबूत किया।
दूरदर्शन के रोचक तथ्य
वर्तमान में दूरदर्शन के 34 सैटेलाइट चैनल, 14 हजार जमीनी ट्रांसमीटर और 66 स्टूडियो हैं, जो इसे देश का सबसे बड़ा प्रसारणकर्ता बनाते हैं।
66 स्टूडियो में से 17 राज्यों की राजधानियों में और 49 अन्य शहरों में हैं।
3 नवंबर 2003 को दूरदर्शन का 24 घंटे चलने वाला समाचार चैनल शुरू हुआ।
दूरदर्शन की शुरुआत के लिए यूनेस्को ने भारत को 20,000 डॉलर और 180 फिलिप्स टीवी सेट प्रदान किए थे।
दूरदर्शन ने न केवल मनोरंजन और सूचना का माध्यम बनकर भारतीय समाज को जोड़ा, बल्कि शिक्षा, कृषि, और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देकर देश के विकास में योगदान दिया। आज भी यह भारतीय टेलीविजन के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है।

