लखनऊ में सीबीआई दफ्तर पर सनसनीखेज हमला: 32 साल पुरानी रंजिश का बदला
लखनऊ, 26 मई 2025: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 24 मई 2025 को सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) के दफ्तर में एक चौंकाने वाली घटना ने सभी को हतप्रभ कर दिया। 65 वर्षीय दिनेश मुर्मू, एक पूर्व रेलवे कर्मचारी, ने सीबीआई के सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) वीरेंद्र सिंह पर धनुष-बाण से हमला कर दिया। यह हमला 1993 के रेलवे भ्रष्टाचार मामले से जुड़ी 32 साल पुरानी रंजिश का परिणाम बताया जा रहा है, जिसने न केवल सीबीआई दफ्तर में हड़कंप मचाया, बल्कि सोशल मीडिया और अखबारों में तहलका मचा दिया।
सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, मुर्मू ने हजरतगंज स्थित सीबीआई दफ्तर के गेट पर तैनात वीरेंद्र सिंह पर सुनियोजित तरीके से तीर चलाए। हमले में वीरेंद्र सिंह के सीने में 5 सेंटीमीटर गहरा घाव हुआ, लेकिन उनकी स्थिति स्थिर है। कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई, कर्मचारी जान बचाने के लिए भागे, और गेट बंद कर दिए गए। एक सुरक्षा गार्ड ने डंडे से मुर्मू को काबू किया, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस पूछताछ में मुर्मू ने बताया कि 1993 में उन्होंने रेलवे में 200 रुपये की रिश्वत लेने वाले कर्मचारी की शिकायत की थी, लेकिन सीबीआई ने उन्हें ही फंसाकर बर्खास्त कर दिया। इससे उनका परिवार और जीवन बर्बाद हो गया। मुर्मू ने कहा, “मैंने 32 साल तक इस अन्याय का बदला लेने का इंतजार किया। मैं पौराणिक न्याय का दूत हूं।” उन्होंने दो महीने तक लखनऊ में सीबीआई दफ्तर की रेकी की थी।
वायरल सीसीटीवी फुटेज ने इस घटना को और चर्चित बना दिया। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स इसे “सतयुग की वापसी” बता रहे हैं, तो कुछ इसे आदिवासी समुदाय की व्यवस्था के खिलाफ नाराजगी से जोड़ रहे हैं। एक एक्स पोस्ट में सवाल उठा कि क्या यह भ्रष्टाचार के खिलाफ एक आदिवासी की लड़ाई है?
सीबीआई ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। यह घटना लखनऊ में हाल ही में ब्रह्मोस मिसाइल इकाई के उद्घाटन के बाद सुरक्षा को और सख्त करने की मांग को बल देती है। यह मामला न केवल व्यक्तिगत रंजिश, बल्कि व्यवस्था में विश्वास की कमी को भी उजागर करता है। पुलिस और सीबीआई गहन जांच में जुटी हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

