तल्लू बासकी बने बिहार अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य: आदिवासी कल्याण को मिलेगा नया बल

बिहार अनुसूचित जनजाति आयोग की बैठक में आदिवासी कल्याण पर चर्चा करते सदस्य।

पटना: बिहार सरकार ने कटिहार जिले के रहने वाले श्री तल्लू बासकी को राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग का सदस्य नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 29 मई 2025 को जारी संकल्प के तहत की गई है। श्री तल्लू बासकी कटिहार के ओलीपुर गांव के रहने वाले हैं और अगले तीन साल तक इस पद पर रहेंगे। उनकी यह नियुक्ति आदिवासी समुदाय के लिए उनके समर्पण और सामाजिक कार्यों को सम्मान देने का एक कदम है।

तल्लू बासकी बिहार अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य के रूप में नियुक्ति पत्र प्राप्त करते हुए।

श्री तल्लू बासकी लंबे समय से कटिहार और आसपास के क्षेत्रों में संथाल और मुंडा जैसे आदिवासी समुदायों के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने आदिवासी बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और स्वरोजगार को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है। इसके अलावा, उन्होंने वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत आदिवासियों के जमीन के अधिकारों के लिए भी आवाज उठाई है। श्री बासकी ने आदिवासी संस्कृति को बचाने के लिए कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए हैं, जिनसे युवा अपनी परंपराओं से जुड़े हैं।

कटिहार के आदिवासी समुदाय के साथ तल्लू बासकी सामाजिक कार्यों में शामिल।बिहार अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन संविधान के अनुच्छेद 338-क के तहत हुआ है। इसका काम आदिवासी समुदायों की समस्याओं को हल करने और उनके कल्याण के लिए सरकार को सुझाव देना है। श्री बासकी इस आयोग में शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और जमीन के अधिकार जैसे मुद्दों पर काम करेंगे। उनकी नियुक्ति से बिहार के आदिवासी समुदाय, जो कटिहार, चंपारण और रोहतास जैसे जिलों में रहते हैं, को बेहतर प्रतिनिधित्व मिलेगा।

 

यह नियुक्ति बिहार में आदिवासी समुदायों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। श्री बासकी के अनुभव और समर्पण से आयोग को और मजबूती मिलेगी। उनकी नियुक्ति को सामाजिक समावेशिता को बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है। यह खासकर आगामी विधानसभा चुनावों के समय में महत्वपूर्ण है, क्योंकि सरकार सभी वर्गों के विकास पर ध्यान दे रही है।

सामान्य प्रशासन विभाग ने इस नियुक्ति की सूचना सभी संबंधित विभागों, जिला अधिकारियों और श्री तल्लू बासकी को भेज दी है। अब वे जल्द ही अपने दायित्वों को शुरू करेंगे। उनके नेतृत्व में आदिवासी समुदाय के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों के क्षेत्र में बड़े बदलाव की उम्मीद है। यह नियुक्ति बिहार के आदिवासियों के लिए एक उज्जवल भविष्य की ओर कदम है।

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