कटिहार में राजद पाठशाला अभियान: तेजस्वी यादव के विकास मॉडल पर वाइट बोर्ड तुलना !

कटिहार में राजद पाठशाला अभियान में वाइट बोर्ड पर तेजस्वी यादव के विकास मॉडल की व्याख्या

कटिहार, बिहार | 21 सितंबर, 2025 : राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने कटिहार विधानसभा क्षेत्र में तेजस्वी यादव के विकास मॉडल को लेकर अनोखा पाठशाला अभियान शुरू किया है। राजद प्रदेश महासचिव समरेंद्र कुणाल के नेतृत्व में गांवों में युवाओं को वाइट बोर्ड पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच मूल्यांकन किया जा रहा है। इस अभियान में महागठबंधन की तेजस्वी सरकार बनने पर माई बहन मान योजना के तहत 2,500 रुपये सामाजिक पेंशन, 1,500 रुपये गैस सिलेंडर, 500 रुपये, 10 लाख सरकारी नौकरियां, 200 यूनिट मुफ्त बिजली, पलायन रोकने के लिए उद्योग स्थापना और बिहार को शिक्षा हब बनाने जैसे एजेंडे की जानकारी दी जा रही है।

कटिहार में राजद पाठशाला अभियान में वाइट बोर्ड पर तेजस्वी यादव के विकास मॉडल की व्याख्या

श्री कुणाल स्कूल या संस्थानों में नहीं, बल्कि गांव-गांव घूमकर वाइट बोर्ड पर लोगों को समझा रहे हैं। बिहार में राजनीति में इस तरह का अभियान पहली बार देखने को मिल रहा है। श्री कुणाल ने बताया कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने महागठबंधन सरकार बनने पर युवा आयोग, मुफ्त बिजली, माई बहन मान योजना, डोमिसाइल नीति और सामाजिक सुरक्षा पेंशन बढ़ाने की बात रखी, जिसका मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कॉपी-पेस्ट कर लिया। यह लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

श्री कुणाल ने 1990 से 2005 तक की राजद सरकार के दौरान सामाजिक न्याय के साथ विकास को वाइट बोर्ड पर बेंचमार्क किया। इसमें शिक्षा के विकास, जिलों, अनुमंडलों और प्रखंडों का क्षेत्रफल छोटा करना, कृषि क्षेत्र में बांध, सोन नदी में डैम, नवगछिया-भागलपुर पुल, रेल क्षेत्र में बरौनी से गुवाहाटी तक रेलवे दोहरीकरण और विद्युतीकरण, कटिहार सहित बिहार के सभी स्टेशनों पर नई स्टेशन बिल्डिंग, नई ट्रेनें, यात्रियों के लिए सुविधाएं और कुलियों को नौकरी जैसे कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

श्री कुणाल ने कहा कि भाजपा-जदयू के पास अपमानित करने वाले शब्दों की किताब है, जिसमें जंगलराज, भूरा बाल और चारा घोटाला की मनगढ़ंत कहानियां हैं, जिनके बल पर बिहार के लोगों को गुमराह किया जाता है। इस अवसर पर राजद नेता लाल उरांव, अंकित सिंह, सिकंदर उरांव, विकास उरांव, राकेश उरांव, पंकज दास, मो. कलाम, मो. साहिल, मदन महकदार, मदन झा, सुनील झा सहित सौ से ज्यादा युवा शामिल थे। यह अभियान बिहार चुनाव में विकास और सामाजिक न्याय को प्रमुख मुद्दा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

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