कटिहार: गांधी-शास्त्री जयंती पर कांग्रेसियों ने दी श्रद्धांजलि, अहिंसा और प्रेम पर जोर !
कटिहार, बिहार | 2 अक्टूबर, 2025: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर कटिहार के कांग्रेस कार्यालय राजेंद्र आश्रम में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कटिहार कांग्रेस अध्यक्ष सुनील कुमार यादव के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में कांग्रेसजनों ने दोनों महापुरुषों के चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। इसके बाद दो मिनट का मौन रखकर उनके दिखाए रास्तों पर चलने का संकल्प लिया गया।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुनील कुमार यादव ने कहा, “गांधीजी ने सत्य, अहिंसा, शांति और समरसता का जो अमर संदेश दुनिया को दिया, वह आज भी पूरी दुनिया के लिए मार्गदर्शक है। बापू ने अपने विचारों और आंदोलनों से न केवल भारत को स्वतंत्रता दिलाई, बल्कि दुनिया को सिखाया कि अन्याय और हिंसा का मुकाबला बिना हथियार उठाए भी किया जा सकता है।” उन्होंने आगे कहा, “ऐसे महापुरुष को कोटि-कोटि नमन, जिन्होंने मानवता को जीने का असली रास्ता दिखाया।” पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को याद करते हुए यादव ने कहा, “शास्त्रीजी की सादगी, ईमानदारी और त्याग आज के नेताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका नारा ‘जय जवान, जय किसान’ आज भी भारत की रीढ़ माने जाने वाले किसानों और सैनिकों को प्रोत्साहन देता है। उनका जीवन सादगी और आदर्शों की मिसाल है।”
किसान प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष दिलीप विश्वास ने गांधीजी और शास्त्रीजी के जीवन पर प्रकाश डाला और उनके बताए रास्तों पर चलने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि गांधी और शास्त्री के विचारों को आमजन तक पहुंचाया जाएगा और उनके दिखाए रास्ते पर चलकर प्रदेश में भाईचारा, समानता और न्याय की भावना को मजबूत किया जाएगा।
जिला प्रवक्ता प्रहलाद गुप्ता ने कहा, “गांधी और शास्त्री जैसे महापुरुषों के आदर्श आज भी समाज को जोड़ने और देश को सही दिशा देने के लिए प्रासंगिक हैं। गांधी का सत्य और अहिंसा का मार्ग, शास्त्री का ‘जय जवान, जय किसान’ का संदेश आज भी हमारे लिए प्रेरणास्रोत हैं।”
इस अवसर पर कांग्रेस नेता दिलीप विश्वास, डॉ. बिपिन सिंह, प्रहलाद गुप्ता, मेजर जमाल, सऊद मुखिया, राजा मिश्रा, अवधेश मंडल, दिलीप मंडल, तेजनारायण सिंह, सुभाष यादव, अखिलेश पोद्दार, अरुण प्यासा, मापूज खान, सुबोध यादव, मोहर्रम खान, इम्तियाज सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।

