आईआईटी पटना में मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने पर राज्य स्तरीय कार्यशाला, 100+ आशा व आंगनबाड़ी दीदियों को मिला प्रशिक्षण
पटना: बिहार में मातृ और शिशु मृत्यु दर को प्रभावी रूप से कम करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) पटना में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
‘एडवांसिंग मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ इन बिहार’ विषय पर आधारित इस महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन आईआईटी पटना और वीमेंस कलेक्टिव फोरम, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में संस्थान के सीनेट हॉल में मंगलवार को संपन्न हुआ।
कार्यशाला में मुख्य उद्देश्य 100 से अधिक फ्रंटलाइन वर्करों, आशा और आंगनबाड़ी दीदियों को सामाजिक परिप्रेक्ष्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की महत्ता समझाना था, ताकि वे जमीनी स्तर पर अग्रिम दूत बनकर मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी ला सकें।
तकनीक और संवेदनशीलता का अनोखा मेल
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन मुख्य अतिथि महावीर कैंसर संस्थान की एमडी डॉ. मनीषा सिंह, आईआईटी पटना की ह्यूमैनिटी साइंस विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पापिया राज, डॉ. आदित्य राज और यूनिसेफ बिहार के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. एस.एस. रेड्डी द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
वर्चुअल माध्यम से जुड़े आईआईटी पटना के निदेशक प्रो. टी.एन. सिंह ने कहा कि तकनीक और चिकित्सा के समन्वय से ही बिहार के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा सकती हैं।
मुख्य अतिथि डॉ. मनीषा सिंह ने राज्य में मातृत्व स्वास्थ्य, कैंसर और गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूकता पर बल दिया, जबकि डॉ. एस.एस. रेड्डी ने स्वास्थ्य प्रणाली को और अधिक संवेदनशील बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
मातृ देखभाल से शिशु पोषण तक हुई गहन चर्चा
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में चिकित्सा विशेषज्ञों ने बिहार के स्वास्थ्य परिदृश्य का गहन विश्लेषण किया। पहले सत्र में डॉ. आदित्य राज की अध्यक्षता में ‘मातृ स्वास्थ्य’ पर चर्चा हुई, जिसमें सुरक्षित प्रसव, प्रसव पूर्व देखभाल और मातृ सेवा से जुड़ी बारीकियां साझा की गईं।
दूसरे सत्र में ‘शिशु स्वास्थ्य’ पर विमर्श हुआ, जिसमें बच्चों में कुपोषण, टीकाकरण, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और स्वास्थ्य सेवाओं में सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग पर विस्तृत चर्चा की गई।
227 प्रतिभागियों को मिला प्रमाण पत्र
समापन सत्र में कुल 227 प्रतिभागियों और शोधार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम की मुख्य आयोजक और प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. पापिया राज ने कहा कि कार्यशाला के निष्कर्षों को नीतिगत सुधारों के लिए बिहार सरकार के साथ साझा किया जाएगा।
कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ. ए. अली और विजय कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर संस्थान के कई वरिष्ठ प्राध्यापक भी उपस्थित रहे।
यह कार्यशाला बिहार में मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


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