शहीद अब्दुल हमीद की पुण्यतिथि: 1965 की जंग में सात पाकिस्तानी टैंकों को ध्वस्त करने वाले वीर की याद !

शहीद अब्दुल हमीद की पुण्यतिथि पर उनकी वीरता को याद करते हुए डाक टिकट की तस्वीर

आज, 10 सितंबर 2025 को देश परमवीर चक्र विजेता शहीद अब्दुल हमीद की पुण्यतिथि मना रहा है, जिन्होंने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अपनी अदम्य वीरता से इतिहास रचा। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के धरमपुर गांव में 1 जुलाई 1933 को जन्मे अब्दुल हमीद ने खेमकरण सेक्टर में सात पाकिस्तानी पैटन टैंकों को ध्वस्त कर युद्ध की दिशा बदल दी थी। उनकी इस वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से नवाजा गया।

अब्दुल हमीद के पिता मोहम्मद उस्मान एक दर्जी थे और चाहते थे कि उनका बेटा उनके पेशे में साथ दे। लेकिन देशभक्ति से प्रेरित अब्दुल ने 20 वर्ष की आयु में 1953 में वाराणसी में भारतीय सेना में भर्ती होने का फैसला किया। नासिक के ग्रेनेडियर्स रेजिमेंटल सेंटर में प्रशिक्षण के बाद उन्हें 1955 में 4 ग्रेनेडियर्स में तैनाती मिली। कुश्ती, लाठी चलाने और तैराकी में माहिर अब्दुल हमीद ने 1962 के भारत-चीन युद्ध में भी थांग ला में 7 माउंटेन ब्रिगेड, 4 माउंटेन डिवीजन के साथ हिस्सा लिया था।

1965 की जंग में वीरता की मिसाल

1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान अब्दुल हमीद पंजाब के तरनतारण जिले के खेमकरण सेक्टर में तैनात थे। 8 सितंबर 1965 को सुबह 9 बजे, जब पाकिस्तानी सेना ने अमेरिकी पैटन टैंकों के साथ उताड़ गांव पर हमला किया, तब अब्दुल हमीद अपनी जीप पर रिकॉयलेस गन के साथ गन्ने के खेतों से गुजर रहे थे। उन्होंने धैर्यपूर्वक टैंकों के रेंज में आने का इंतजार किया और सटीक निशाने से एक साथ चार टैंकों को नष्ट कर दिया। उनकी इस कार्रवाई ने पाकिस्तानी सेना को हतप्रभ कर दिया।

9 सितंबर को उनकी इस वीरता की खबर सेना मुख्यालय तक पहुंची। अगले दिन, 10 सितंबर 1965 को, अब्दुल हमीद ने तीन और पाकिस्तानी टैंकों को ध्वस्त किया। लेकिन इसी दौरान एक पाकिस्तानी सैनिक की गोली का निशाना बनते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी शहादत ने देश को एक अमर नायक दिया, जिसकी वीरता आज भी प्रेरणा का स्रोत है।

सम्मान और स्मृति

अब्दुल हमीद की वीरता के सम्मान में उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, वर्ष 2000 में भारतीय डाक विभाग ने उनकी स्मृति में 3 रुपये का एक डाक टिकट जारी किया, जिसमें वे जीप पर सवार होकर रिकॉयलेस राइफल से गोली चलाते नजर आते हैं। उनकी यह तस्वीर देशभक्ति और साहस का प्रतीक बन चुकी है।

हर साल उनकी पुण्यतिथि पर देश उनके बलिदान को याद करता है और उनकी वीरता को नमन करता है। शहीद अब्दुल हमीद का जीवन और शहादत आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस और देशभक्ति की मिसाल बनी रहेगी।

5 thoughts on “शहीद अब्दुल हमीद की पुण्यतिथि: 1965 की जंग में सात पाकिस्तानी टैंकों को ध्वस्त करने वाले वीर की याद !”

  1. I’ve been looking for a reliable platform like this for a while. The interface is super smooth and the payouts are surprisingly fast. Definitely worth a try for anyone who likes a seamless gaming experience. idakunjp

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

adsterra ad